Saturday, November 15, 2008

आप बोलते ही रहे और..... हम खामोश रहे.

आप बोलते ही रहे और हम खामोश रहे.
एक अरसा सा बीत गया, जो आप हमे नज़र आये,
एक तूफ़ान दिल में लिए आप से जुदा हुए थे कभी,
वो तूफ़ान अभी थमा था की,
आप फिर इस बंजर जमीं में बारिस ले आये.

आपकी आखो में एक चमक देखी थी कभी,
वो चमकते सितारे फिर आखो में नज़र आये.
हम ने जो पूछा हाले बया आपसे अभी,
अपना नाम हम शब्दों में तलासते रहे,
और आप किसी और ही के ख्यालो में नज़र आये.

खो गया उन सपनो में जो हमने साथ बुने थे कभी,
चल दिया उन रास्तो पर, जहा हम साथ चले थे कभी.
उन रास्तो की मंजिलो को अभी छुआ ही था की,
कुछ “नयी मंजिलो” को पार कर,
आप उन ही पुराने रास्तो पर नज़र आये.

एक चुभन सी ले कर आप कभी गये थे हमसे दूर,
और आज एक दर्द बनकर वापस है आये.
कुछ सपने दफ़न किये, कुछ इरादे अपने से किये दूर,
उस भीगे दुपटे की याद जरा आयी थी अभी,
और आप एक नए लिबाज में हमारे सामने नज़र आये.

जब कहना चाहा आप ने कुछ तो कुछ कह ना पाए,
हम भी कभी नज़र मिलाते, कभी नज़र चुराते गए.
खता हमारी जो दिल की बात आप को कभी कहे न पाए
आज आपसे मिल कुछ कहना चाहा मगर,

आप बोलते ही रहे और हम खामोश रहे.
आप बोलते ही रहे और हम खामोश रहे......

( Because some moments are not supposed to be repeated.....)
Vikram Agrawal 16.11.2008.

1 Comments:

Blogger Troy the Mystic said...

Wonderful, awesome, masterpiece...

I can see a budding poet, jiyo mere laal.

10:42 AM  

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